नई दिल्ली. भारत सरकार ने समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए युद्ध पोत खरीदने का बड़ा सौदा किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने भी इस खरीद को मंजूरी दे दी है. इन सौदों की कीमत करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये बताई जाती है. इसमें से वॉरशिप की कीमत करीब 70 हजार करोड़ रुपये होगी. केंद्रीय कैबिनेट के मंजूरी के बाद अब रक्षा मंत्री की अगुवाई वाली डिफेंस एक्यूजिशन काउंसिल की ओर से हरी झंडी का इंतजार है.
बढ़ जाएगी सामरिक शक्ति
भारत सरकार अपनी समुद्री सीमाओं को मजबूत करने पर खासा जोर दे रही है. माना जा रहा है कि अगले तीन महीने में भारत की सैन्य शक्ति में काफी इजाफा होगा, खासकर इंडियन नेवी में. नेवी के लिए सरकार कलवरी क्लास की 3 सबमरीन खरीद रही है. इसका अप्रूवल भी साल के अंत तक मिल जाएगा. इंडियन नेवी का अनुमान है साल 2027 तक भारत के बेड़े में 200 वॉरशिप जुड़ जाएंगी.
इस खरीद की खबर बाहर आते ही शेयर बाजार में बड़ी हलचल दिखी. कोचीन शिपयार्ड कंपनी के शेयर एनएसई पर 1,922 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे. इसी तरह, मझगांव डॉक के शेयरों में 7 फीसदी का उछाल दिखा तो गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के शेयर भी 6 फीसदी बढ़त के साथ ट्रेडिंग कर रहे थे. इसके अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयर 1.67 फीसदी की बढ़त पर कारोबार करते दिखे.
एचएएल को मिला 26 हजार करोड़ का ऑर्डर
शिपिंग स्टॉक में उछाल के साथ अन्य डिफेंस स्टॉक में भी तेजी दिख रही है. इसका बड़ा कारण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेडको मिला ऑर्डर भी है. एचएएल को करीब 26 हजार करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. इससे पहले भारतीय नेवी ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री ताकत बढ़ाने की बात कही थी. इसके लिए DAC ने 10 से 12 हजार टन के विस्फोटक और हथियार जल्द उपलब्ध कराने की बात कही थी.


