देश के चार राज्यों की पांच विधानसभा सीटों- गुजरात की कादी और विसावदर, केरल की नीलांबुर, पंजाब की लुधियाना वेस्ट और पश्चिम बंगाल की कालीगंज- पर उपचुनाव के लिए मतदान चल रहा है। ये उपचुनाव विधायकों के इस्तीफे या निधन के कारण हो रहे हैं। सभी सीटों पर मतगणना 23 जून को होगी।
चार राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान चल रहा है। जिन सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें गुजरात की कादी और विसावदर विधानसभा सीट शामिल हैं। ऐसे ही केरल की नीलांबुर, पंजाब की लुधियाना और पश्चिम बंगाल की कालीगंज विधानसभा सीट पर वोटिंग चल रही है। सुबह 11 बजे तक गुजरात की विसावदर सीट पर 28.15 फीसदी, कादी सीट पर 23.85 फीसदी, केरल की नीलांबुर सीट पर 30.15 फीसदी, पंजाब की लुधियाना पश्चिम सीट पर 21.15 फीसदी और पश्चिम बंगाल की कालीगंज विधानसभा सीट 30.64 फीसदी मतदान हुआ।
सुबह नौ बजे तक पश्चिम बंगाल की कालीगंज विधानसभा सीट पर 10.38 फीसदी और केरल की नीलांबुर विधानसभा सीट पर 13.15 प्रतिशत मतदान हुआ था। इससे पहले सुबह सात बजे पंजाब के लुधियाना पश्चिम उपचुनाव में मतदान शुरू हो गया। कांग्रेस उम्मीदवार भारत भूषण आशु ने कहा कि लोग चुनाव प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। यहां आप ने संजीव अरोड़ा, कांग्रेस ने भारत भूषण आशु, भाजपा ने जीवन गुप्ता और SAD ने परुपकर सिंह घुम्मन को उम्मीदवार बनाया है। उधर, पश्चिम बंगाल में नादिया के कालीगंज उपचुनाव के लिए मतदान केंद्र 171 पर मतदान जारी है। इस निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी की अलीफा अहमद, भाजपा के आशीष घोष और कांग्रेस के काबिल उद्दीन शेख उम्मीदवार हैं। केरल में नीलांबुर विधानसभा उपचुनाव में सरकारी लोअर प्राइमरी स्कूल, वीट्टीकुथ में मतदान केंद्र संख्या 184 पर मतदान शुरू हुआ। एलडीएफ ने एम स्वराज को, यूडीएफ ने आर्यदान शौकत को, जबकि भाजपा ने एडवोकेट मोहन जॉर्ज को उम्मीदवार बनाया है।
क्यों कराने पड़ रहे उपचुनाव?
गुजरात की कादी सीट करसनभाई पंजाभाई सोलंकी के निधन की वजह से खाली हुई थी। ऐसे ही विसावदर विधानसभा सीट आप विधायक भयानी भूपेंद्रभाई गंदूभाई के इस्तीफे की वजह से खाली हुई थी। केरल की नीलांबुर सीट पीवी अनवर के इस्तीफे की वजह से खाली हुई थी। वहीं पंजाब की लुधियाना विधानसभा सीट पर गुरप्रीत बस्सी गोगी के निधन की वजह से उपचुनाव कराया जा रहा है। जबकि पश्चिम बंगाल की कालीगंज विधानसभा सीट पर उपचुनाव इस वजह से कराया जा रहा है, क्योंकि यहां नसीरुद्दीन अहमद का निधान हो गया था।