नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत आज (26 जून) अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर पहुंच गए हैं। उनके साथ 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी इस मिशन में शामिल हैं। स्पेस-ङ्ग का ड्रैगन यान इन चारों को लेकर करीब 29 घंटे की यात्रा के बाद ढ्ढस्स् के हार्मनी मॉड्यूल से सफलतापूर्वक जुड़ गया है। अब स्पेस स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री इनका औपचारिक स्वागत करेंगे और मिशन की शुरुआत होगी। शुक्ला और उनकी टीम अब ढ्ढस्स् पर करीब 2 हफ्ते तक रहेगी। इस दौरान सभी चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 60 वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लेंगे। ये प्रयोग मानव शरीर, दवाओं और तकनीक पर अंतरिक्ष के प्रभाव को समझने के लिए किए जाएंगे।
इसके साथ ही, ये मिशन माइक्रोग्रैविटी में नई खोजों और स्वास्थ्य से जुड़े परीक्षणों में भी योगदान देगा, जो भविष्य की चिकित्सा तकनीकों में मददगार हो सकते हैं। यह मिशन भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार कोई भारतीय ढ्ढस्स् तक पहुंचा है और करीब 41 साल बाद कोई भारतीय फिर से अंतरिक्ष में गया है। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष गए थे, लेकिन वह ढ्ढस्स् तक नहीं पहुंचे थे। शुक्ला की यह यात्रा ढ्ढस्क्रह्र के गगनयान मिशन के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है और इससे भविष्य की तैयारी को मजबूती मिलेगी।
ढ्ढस्स् से जुडऩे से पहले आज शुक्ला का अंतरिक्ष में यान के अंदर का एक वीडियो भी सामने आया था। उन्होंने वीडियो की शुरुआत ‘नमस्कार’ कहकर की और अपने अनुभव को ‘अविश्वसनीय’ बताया। शुक्ला ने कहा कि वह शून्य गुरुत्वाकर्षण में खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक बच्चे जैसा महसूस हो रहा है जो अभी चलना सीख रहा हो और खुद को संभालना सीख रहा हो।




