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छत्तीसगढ़ के आदिवासी गांवों में चल रहा आयुष्मान कार्ड अभियान:4,700 से ज्यादा आदिवासी गांवों में लगाए गए कैंप, हजारों लोगों को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा

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छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग के नेतृत्व में प्रदेश के सभी आदिवासी बहुल्य ग्रामों में 15 जून से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य छूटे हुए आदिवासी सदस्यों का आयुष्मान कार्ड बनवाना और उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है।

भारत सरकार के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के निर्देश पर इस वर्ष को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी के तहत 15 जून 2023 से 30 जून 2025 तक “धरती आबा, जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA)” छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास विभाग के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भी मुख्य भूमिका निभा रहा है।

अब तक 20 हजार से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बने

राज्य के 85 आदिवासी बहुल्य विकास खंडों और 6691 चिन्हांकित जनजातीय गांवों में अभियान चलाकर हर घर तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बनाई जा रही है। मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत कर्मचारी ऐसे आदिवासियों के आयुष्मान कार्ड के पंजीयन करवा रहे हैं, जिनके पास कार्ड नहीं है। अब तक 4,763 गांवों में कैंप लगाए जा चुके हैं और 20,988 आदिवासियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यह अभियान 30 जून 2025 तक जारी रहेगा।

अभियान में बुजुर्गों ने दिखाया उत्साह

विशेष रूप से 70 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों ने इस अभियान में गहरी रुचि दिखाई है। उन्हें आधार कार्ड के आधार पर “आयुष्मान व्यय वंदना कार्ड” बनवाने का मौका दिया जा रहा है। इस कार्ड के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सालाना 5 लाख रुपए तक निःशुल्क उपचार सहायता मिलेगी।

 

इस प्रकार राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं से आदिवासी समुदाय को जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास जारी हैं, जिससे जनजातीय गौरव वर्ष की भावना को और मजबूत किया जा सके।

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