भाटापारा में शहर और ग्रामीण क्षेत्र मिलाकर 22 बड़े शराब माफिया सक्रिय हैं, जिनके अधीन लगभग 80 छोटे कोचिए विभिन्न इलाकों में अवैध शराब की आपूर्ति कर रहे हैं। भाटापारा के अलावा सिमगा ब्लॉक में भी हालात चिंताजनक हैं।
भाटापारा को जहां एक ओर ‘धर्म नगरी’ के नाम से जाना जाता है। वहीं, दूसरी ओर वर्तमान समय में लचर अबकारी व्यवस्था के चलते यह शहर असामाजिक तत्वों के लिए ‘मैखाना’ बनता जा रहा है। ब्लॉक भाटापारा में शहर और ग्रामीण क्षेत्र मिलाकर 22 बड़े शराब माफिया सक्रिय हैं, जिनके अधीन लगभग 80 छोटे कोचिए विभिन्न इलाकों में अवैध शराब की आपूर्ति कर रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि अबकारी विभाग में कुछ ऐसे व्यक्ति कार्यरत हैं, जो न तो शासन द्वारा नियुक्त हैं और न ही किसी अधिकृत प्लेसमेंट एजेंसी से जुड़े हुए हैं। फिर भी वे विभागीय कार्यालय में आते-जाते और दफ्तर का कार्य करते देखे जाते हैं। आरोप यह भी है कि ये लोग अवैध शराब कारोबारियों और कोचियों से मोटी रकम की वसूली करते हैं। भाटापारा के अलावा सिमगा ब्लॉक में भी हालात चिंताजनक हैं।
सूत्रों के अनुसार, यहां 37 लोग अवैध शराब कारोबार में संलिप्त हैं और प्रत्येक माह लगभग 4,28,000 रुपये की अवैध वसूली की जाती है। इस पूरे मामले में जब जिला अबकारी अधिकारी गजेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, ‘हमें नाम बताएं, हम तुरंत कार्रवाई करेंगे। यदि कोई व्यक्ति अबकारी विभाग के नाम पर वसूली करता है तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर कराएं। विभाग में किसी भी प्राइवेट व्यक्ति की नियुक्ति अवैध है, सभी संबंधितों को निर्देश दिया जाएगा कि ऐसे लोगों को तत्काल हटाया जाए।’



