रायगढ़ के कर्मागढ़ में मानकेश्वरी मंदिर में शरद पूर्णिमा पर बैगा के शरीर में देवी का आगमन होता है, जहां सैकड़ों बकरों की बलि दी जाती है। नवरात्र से शुरू होने वाली इस प्राचीन परंपरा में हजारों श्रद्धालु मन्नतें मांगने और मेले के माहौल में शामिल होने पहुंचते हैं।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में रियासतकालीन से चली आ रही परम्परा आज भी कर्मागढ़ के मानकेश्वरी मंदिर में जारी है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर यहां सैकड़ों बकरों की बलि दी जाती है। इस दौरान यहां हजारों की भीड़ उमड़ती है और मेले सा माहौल बनता है। रायगढ़ जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर स्थित है कर्मागढ़ गांव जो की जंगलों से घिरा हुआ है। कर्मागढ़ मंदिर में नवरात्र के दौरान ही यहां आस्था का ज्योत प्रज्ज्वलित होती है, जो शरद पूर्णिमा के दूसरे दिन समाप्त होती है। इस दौरान यहां बलि की भी परंपरा है। सदियों से चली आ रही परम्परा के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन आयोजित पूजा अर्चना के दौरान यहां के बैगा के शरीर में मां मानकेशरी देवी का प्रभाव होता है जो बकरो की बली को ग्रहण करती हैं।



