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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए नई पहल

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ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया

आयुष विभाग व जिला चिकित्सालय का संयुक्त अभियान, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील

थान खम्हरिया। स्वास्थ्य विभाग जिला बेमेतरा द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयुष विभाग और जिला चिकित्सालय के संयुक्त प्रयास से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
यह जागरूकता अभियान छत्तीसगढ़ शासन के संचालनालय आयुष विभाग एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संचालित जिला चिकित्सालय बेमेतरा के एनसीडी क्लीनिक द्वारा आयुष विभाग के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों को योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।


यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर, जिला आयुष अधिकारी डॉ. वीणा मिश्रा तथा सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। अभियान में आयुष विभाग के आयुर्वेद चिकित्सक एवं पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. चिरंजीवी वर्मा तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. भूमिका साहू की प्रमुख भूमिका है।
जीवनशैली से बढ़ रहीं बीमारियां
विशेषज्ञों के अनुसार आज के समय में बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा, लीवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। चिकित्सा विज्ञान में इन्हें गैर-संक्रामक रोग (एनसीडी) कहा जाता है। समय रहते इन पर ध्यान न देने पर ये बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं।
इसी उद्देश्य से एनसीडी क्लीनिक की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही है। जनवरी माह से अब तक पेंड्रितराई, जेवरा, मोहरेंगा, कुसुमी, वृद्धाश्रम बेमेतरा, कोबिया, पिकरी, विद्यानगर और मानपुर सहित कई स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
भोजन ही सबसे बड़ी दवा
आयुर्वेद चिकित्सक (पोस्ट ग्रेजुएट) डॉ. चिरंजीवी वर्मा ने कहा कि आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां समाज के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधियों को अपनाकर इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि हम अपने भोजन को संतुलित और प्राकृतिक रखें तो वही भोजन हमारे शरीर के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है।”
रोग के अनुसार ही करें योग
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. भूमिका साहू ने बताया कि योगाभ्यास हमेशा व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और रोग के अनुसार ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को कपालभाति और भस्त्रिका जैसे तीव्र प्राणायाम नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे रक्तचाप बढ़ सकता है। इसलिए योग का अभ्यास विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना उचित है।
प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व
डॉ. भूमिका साहू ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा का आधार प्रकृति के तत्व जैसे जल, मिट्टी, वायु, सूर्य और पेड़-पौधे हैं। उन्होंने कहा कि कई छोटी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान घर में उपलब्ध साधारण चीजों से भी किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर गैस या एसिडिटी होने पर जीरा, अजवाइन, सौंफ और धनिया का पानी पीने से पाचन तंत्र को लाभ मिलता है और राहत मिल सकती है।
सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना महत्व
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा अपनाने का अर्थ यह नहीं है कि एलोपैथिक चिकित्सा का महत्व कम है। आपातकालीन परिस्थितियों में एलोपैथिक चिकित्सा जीवनरक्षक सिद्ध होती है। तेज बुखार, तीव्र दर्द या गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में पहल
आयुष विभाग और जिला चिकित्सालय के संयुक्त प्रयास से चलाया जा रहा यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस पहल के माध्यम से लोगों को संतुलित आहार, नियमित योग और प्रकृति के साथ जुड़कर स्वस्थ जीवन जीने का संदेश दिया जा रहा है।

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