गरियाबंद। जिले के जंगल क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक खतरनाक घटना सामने आई है, जहां महुआ संग्रहण के लिए जंगल गए एक ग्रामीण पर जंगली भालू ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
मिली जानकारी के अनुसार, गरियाबंद वनमंडल के परसुली परिक्षेत्र अंतर्गत कोचई मुड़ा गांव निवासी 45 वर्षीय पुराणिक (पिता सूघो राम यादव) मंगलवार सुबह करीब 6 बजे अपनी पत्नी के साथ घर के समीप स्थित जंगल में महुआ बीनने गया था। इस दौरान उसकी पत्नी कुछ दूरी पर महुआ एकत्र कर रही थी, जबकि पुराणिक पास ही पेड़ों के नीचे गिरे महुआ इकट्ठा कर रहा था।
इसी बीच अचानक झाड़ियों से निकलकर एक जंगली भालू ने उस पर हमला कर दिया। भालू ने बेहद आक्रामक तरीके से पुराणिक के सिर, चेहरे, हाथ और कंधे को अपने पंजों और दांतों से बुरी तरह नोच डाला। हमले के दौरान पुराणिक की दर्दनाक चीखें सुनकर उसकी पत्नी घबराकर मौके पर पहुंची और शोर मचाने लगी। शोरगुल सुनकर भालू जंगल की ओर भाग गया, जिससे पुराणिक की जान बच सकी।
घटना के बाद घायल अवस्था में पड़े पुराणिक को ग्रामीणों ने तत्काल मदद पहुंचाई। परिजनों और ग्रामीणों ने मिलकर उसे निजी वाहन के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया। हालांकि उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल रायपुर रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
इस घटना के बाद कोचई मुड़ा सहित आसपास के गांवों में भय का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों ने जंगल जाने में डर जताया है, खासकर महुआ संग्रहण के इस मौसम में जब बड़ी संख्या में लोग रोजाना जंगल का रुख करते हैं।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने और आवश्यक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने की भी मांग उठ रही है।
वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को जंगल जाते समय समूह में जाने, सतर्क रहने और किसी भी वन्यजीव की हलचल दिखने पर तुरंत सूचना देने की सलाह दी जा रही है। बावजूद इसके लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।
महुआ सीजन में इस तरह की घटनाएं हर साल सामने आती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। अब जरूरत है कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर ठोस रणनीति बनाएं, ताकि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।




