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“मैन मेकिंग प्रोसेस से ही होगा राष्ट्र का वैभव निर्माण”: प्रवीण

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प्रमुख जन गोष्ठी में बड़ी संख्या में प्रमुख जनों की हुई सहभागिता
– डॉक्यूमेंट्री फिल्म और साहित्य परिचय से बताया गया संघ की 100 वर्ष की यात्रा
रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रायपुर महानगर के अंतर्गत देवेंद्र नगर स्थित गुजराती स्कूल सभागार में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रमुख जनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ संघ के रायपुर विभाग संघचालक धीरेंद्र नसीने, महानगर संघचालक महेश बिरला तथा मुख्य वक्ता मध्य क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।
अपने संबोधन में मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त ने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में सात प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के बीच कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि लोग जानना चाहते हैं कि संघ की स्थापना क्यों हुई, संघ क्या करता है जैसे अनेक प्रश्न लोगों के मन में है जिसका उत्तर संघ की प्रार्थना की अंतिम पंक्ति है- भारत माता की जय…. । इसी जय के लिए गतिविधियाँ होती हैं ।


उन्होंने भारत के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों वर्षों के आक्रमणों के बावजूद भारत की आत्मा अडिग रही। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए काम करनेवालों की चार धाराओं का विश्लेषण करते हुए बताया कि पहली धारा – क्रांति की धारा, दूसरी धारा – राजनीति के साथ राजनीतिक नेतृत्व और जागृति से समाज परिवर्तन करना, तीसरी धारा – समाज की कुरीतियों, चुनौतियों के लिए सुधारवादी आंदोलन करना, और चौथी धारा के अंतर्गत स्व के भाव से भारत की स्वतंत्रता की कल्पना करना तथा उक्त तीनों धाराओं को लेकर एक साथ चलना।
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने उक्त तीनों धाराओं को सम्मान दिया । तमाम अध्ययनों के बाद उन्होंने समाज की तीन प्रमुख कमजोरियां – असंगठित समाज , स्वाभिमान शून्य समाज, स्वार्थी समाज को देखा, जिसे दूर करने के लिए संघ की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि संघ की एक घंटे की शाखा “मैन मेकिंग प्रोसेस” है, जहां एक सच्चे, राष्ट्रनिष्ठ नागरिक का निर्माण होता है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के दर्शनों के अनुसार संघ की 100 वर्ष की यात्रा को उपहास, विरोध और स्वीकार्यता के तीन चरणों से गुजरते हुए बताया। उन्होंने कहा कि आज समाज में संघ की व्यापक स्वीकार्यता है। स्वीकार्यता में आज समाज का हर एक व्यक्ति संघ को जानता है। उन्होंने संघ की स्वीकार्यता की बातों को बताते हुए कहा कि आज भारत के इंच – इंच भूभाग पर भगवा फहरा रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ व्यक्तित्व का निर्माण करता है और वह कुछ नहीं करेगा परंतु उसके स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेंगे। महिलाओं को संघ से जोड़ने के लिए राष्ट्र स्वयंसेविका समिति बनाई गई, शिक्षा के विकास के लिए विद्या भारती, विद्यार्थियों के बीच कार्य करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मजदूरों के बीच भारतीय मजदूर संघ जैसे 40 से अधिक संगठन पर कार्य हो रहा है, जो संघ की स्वीकार्यता को परिभाषित करती है। सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों के त्याग और समर्पण के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
प्रवीण गुप्त ने “पंच परिवर्तन”—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य—को समाज परिवर्तन का आधार बताते हुए सभी से इसे जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफल जीवन से अधिक महत्वपूर्ण सार्थक जीवन है, जिसे अपनाकर ही भारत विश्व में अग्रणी बन सकता है।
कार्यक्रम की प्रस्तावना नंदन जैन ने रखी, जबकि संचालन अमेय अगस्ती ने किया। प्रारंभ में संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में शहर की 131 बस्तियों से हजारों की संख्या में प्रमुख जन उपस्थित रहे।

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