ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। श्री पाटेश्वरधाम आश्रम में कथित तोड़फोड़, मूर्तियों को खंडित करने एवं हटाने तथा जिला प्रशासन द्वारा नाले की दीवार तोड़े जाने की घटना को लेकर संत समाज में गहरा रोष व्याप्त है। संतों ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
पंचखण्ड पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी सोमेन्द्र जी महाराज ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पाटेश्वरधाम संत रामबालकदास जी एवं उनके गुरुदेव की तपस्थली है। वर्षों की तपस्या और परिश्रम से यहां हजारों वृक्ष लगाए गए, जल स्रोत विकसित किए गए तथा पर्यावरण संरक्षण का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि पाटेश्वरधाम आज सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करेगा।
स्वामी सोमेन्द्र जी महाराज ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीणों की धाम के प्रति गहरी आस्था है, किंतु कुछ तत्वों द्वारा आश्रम के संबंध में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है तथा अतिक्रमण के निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं उनके द्वारा स्थल का भ्रमण किया गया है और संत रामबालकदास जी के प्रयासों से यह स्थान एक सुंदर एवं आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री से सनातन धर्म के मठ-मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही बालोद जिला प्रशासन द्वारा नाले पर निर्मित दीवार तोड़े जाने के मामले में प्रस्तुत रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की।
घटना के बाद संत समाज में व्यापक नाराजगी देखी जा रही है। संतों ने प्रशासन से पाटेश्वरधाम की पवित्रता, गरिमा एवं शुचिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।




