ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया, 2 जुलाई। पाटेश्वरधाम के ऑनलाइन सत्संग में संत रामबालकदास जी ने संत कबीरदास के जीवन-दर्शन एवं उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कबीर की वाणी आज भी समाज के लिए उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने अपने सरल, स्पष्ट और निर्भीक विचारों से समाज को नई दिशा प्रदान की तथा प्रेम, सत्य, मानवता और सच्ची भक्ति का संदेश दिया।
संत रामबालकदास जी ने कहा कि कबीरदास ने ऊंच-नीच, जाति-पाति, अंधविश्वास, धार्मिक आडंबर और पाखंड का विरोध करते हुए मानवता को सर्वोपरि माना। उनका मानना था कि ईश्वर किसी बाहरी स्थान पर नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में विराजमान हैं। इसलिए सच्ची भक्ति के लिए शुद्ध मन और निष्कपट भाव आवश्यक है, न कि केवल बाहरी कर्मकांड।
उन्होंने कहा कि कबीरदास के अनुसार मनुष्य की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से होती है। उन्होंने मंदिर, मस्जिद और तीर्थों की अपेक्षा आत्मचिंतन, सदाचार और ईश्वर के प्रति सच्चे समर्पण को अधिक महत्व दिया। कबीर ने प्रेम, दया, करुणा, भाईचारे और सद्भाव को जीवन का मूल आधार बताया।
संत रामबालकदास जी ने कहा कि कबीरदास ने गुरु को जीवन का सच्चा मार्गदर्शक माना। उनका मत था कि गुरु ही मनुष्य को ईश्वर तक पहुंचने का सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां से भी अच्छा ज्ञान मिले, उसे विनम्रता के साथ ग्रहण करना चाहिए तथा अंधविश्वास और भ्रम का त्याग करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी समाज जातिवाद, धार्मिक कट्टरता, भेदभाव, हिंसा और अंधविश्वास जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में संत कबीर के विचार प्रेम, समानता, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि मन से किए गए भक्ति, श्रद्धा, विश्वास और सद्भाव के माध्यम से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
ऑनलाइन सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जुड़कर संत कबीरदास के जीवन-दर्शन एवं उनकी शिक्षाओं का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।



