ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया,। नगर के श्री सतीष केड़िया के निवास पर आयोजित साप्ताहिक रामायण कथा में श्री राधाकृष्ण जमात मंदिर के महंत बसंतबिहारी दास जी ने रामचरितमानस के प्रसंगों का भावपूर्ण व्याख्यान करते हुए पातिव्रत्य धर्म की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री की वास्तविक परीक्षा विपत्ति के समय होती है।
महंत बसंतबिहारी दास जी ने माता अनसूया एवं माता सीता के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता, भाई एवं अन्य संबंधी जीवन में सीमित सुख देने वाले होते हैं, जबकि पति-पत्नी का संबंध जीवनभर साथ निभाने वाला पवित्र बंधन है। उन्होंने कहा कि पत्नी के लिए पति की सेवा ही सर्वोच्च धर्म, नियम और व्रत माना गया है तथा तन, मन और वचन से पति के प्रति समर्पण नारी जीवन का आदर्श है।
कथा के दौरान उन्होंने वेद-पुराणों के आधार पर पातिव्रता स्त्रियों के विभिन्न स्वरूपों की व्याख्या करते हुए कहा कि उत्तम पतिव्रता अपने पति के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष का विचार भी नहीं करती, जबकि मध्यम श्रेणी की पतिव्रता अन्य पुरुषों को पिता, भाई अथवा पुत्र के समान मानती है। उन्होंने श्रोताओं से पारिवारिक मर्यादा, सदाचार एवं धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
महंत बसंतबिहारी दास जी ने कहा कि छल-कपट का त्याग कर पातिव्रत धर्म का पालन करने वाली स्त्री को परम कल्याण की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि माता अनसूया ने माता सीता को आदर्श नारी धर्म का उपदेश देते हुए कहा कि उनका जीवन समस्त महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। कथा का उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और धर्म के प्रति आस्था को सुदृढ़ करना है।
साप्ताहिक रामायण कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर रामचरितमानस के प्रसंगों का श्रवण किया तथा धर्मलाभ प्राप्त किया।




