Home छत्तीसगढ़ सात दिवसीय श्रीराम कथा एवं हिंदू सनातन धर्म प्रचार का शुभारंभ

सात दिवसीय श्रीराम कथा एवं हिंदू सनातन धर्म प्रचार का शुभारंभ

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राधा-कृष्ण जमात मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण, सनातन संस्कृति का दिया जा रहा संदेश

ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया

थानखम्हरिया। नगर के प्राचीन राधा-कृष्ण जमात मंदिर में हिंदू सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार एवं जनजागरण के उद्देश्य से सात दिवसीय श्रीराम कथा का शुभारंभ श्रद्धा एवं भक्ति के साथ हुआ। कथा का वाचन प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से पधारे श्री सीताराम धर्म प्रचारक आचार्य अखिलेश मिश्रा द्वारा किया जा रहा है। कथा के प्रथम दिवस से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प ले रहे हैं।

अपने उद्बोधन में आचार्य अखिलेश मिश्रा ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जीवन का दर्पण और जीवन जीने की श्रेष्ठ कला का मार्गदर्शक है। उन्होंने मानस के चार घाटों की व्याख्या करते हुए कहा कि यह कथा समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समान रूप से उपयोगी और प्रेरणादायक है। ज्ञान की तलाश करने वाले जिज्ञासुओं, भगवान के भक्तों, समाजसेवियों, कर्मयोगियों तथा स्वयं को कमजोर या असमर्थ मानने वाले व्यक्तियों को भी श्रीरामचरितमानस नई दिशा, आत्मविश्वास और जीवन का उद्देश्य प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम कथा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। यह कथा भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को सुनाई गई, काकभुशुण्डि द्वारा गरुड़ जी को सुनाई गई, महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा भारद्वाज ऋषि को सुनाई गई और अंततः तुलसीदास जी ने इसे लोकभाषा में प्रस्तुत कर समस्त समाज के लिए सहज और सुलभ बना दिया। यही श्रीरामचरितमानस की महानता है कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है।

आचार्य मिश्रा ने कहा कि आज के समय में मौलिकता और अहंकार का भाव बढ़ता जा रहा है, जबकि रामकथा हमें विनम्रता का संदेश देती है। भगवान शंकर जैसे आदियोगी भी यह दावा नहीं करते कि रामकथा उनकी रचना है, बल्कि वे स्वयं कहते हैं कि वे भी इस अनादि और अनंत कथा का श्रवण कर रहे हैं। इससे यह शिक्षा मिलती है कि आध्यात्मिक ज्ञान में अहंकार का कोई स्थान नहीं है तथा व्यक्ति को सदैव स्वयं को ईश्वर का माध्यम मानकर कार्य करना चाहिए।

उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, सेवा, त्याग, करुणा और धर्मपालन—को अपने जीवन में उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस का नियमित अध्ययन और कथा श्रवण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है तथा परिवार और समाज में प्रेम, समरसता एवं संस्कारों का संचार करता है।

कथा के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया तथा भगवान श्रीसीताराम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। आयोजन समिति ने बताया कि सात दिनों तक प्रतिदिन श्रीराम कथा, भजन-कीर्तन एवं धर्मोपदेश का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। समिति ने नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।

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