ईडी के मुताबिक, ऑनलाइन सट्टेबाजी से मिले करोड़ों की रकम को नगद के बदले फर्जी एंट्री के जरिए शेल (फर्जी) कंपनियों में भेजा जाता था। फिर ब्लैकमनी को दुबई, मॉरिशस और यूनाइटेड किंगडम स्थित कंपनियों के जरिये कई लेवल पर भेजा जाता था। दुबई इस मनी लॉन्ड्रिंग खेल का केंद्रीय बिंदु था। वहां से राशि को मॉरिशस और यूके की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। इस रुपये को क्यूआईपी, एफपीआई, एफडीआई और एफसीसीबी जैसे वैध माध्यमों से विकास गर्ग के नियंत्रण वाली लिस्टेड और गैर-लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेश के रूप में भारत वापस लाया गया।