ईरान का अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण पलटवार
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार रात दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाया। अमेरिकी केंद्रीय सैन्य कमान ने शनिवार तड़के बताया कि लगातार सातवीं रात चलाए गए अभियान के दौरान ईरान की निगरानी व्यवस्था, सैन्य रसद केंद्रों और भूमिगत हथियार भंडारण स्थलों पर हमले किए गए।
इधर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कहा कि उसने जॉर्डन सहित कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और मानव रहित विमानों से हमला किया है। अमेरिकी समाचार माध्यमों के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिका द्वारा उपयोग किए जा रहे कम से कम दो सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। हालांकि अभी तक किसी अमेरिकी या जॉर्डन के सैनिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है और घायलों की संख्या तथा उनकी स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक इन हमलों में सैनिकों के घायल होने की पुष्टि नहीं की है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका लंबे समय से जॉर्डन के कई सैन्य अड्डों का उपयोग करता है, लेकिन सुरक्षा कारणों से वह अपने सभी सैन्य ठिकानों का विवरण सार्वजनिक नहीं करता।
जॉर्डन में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य मौजूदगी मुवाफ्फक साल्टी वायुसेना अड्डे पर है। यह मूल रूप से जॉर्डन की वायुसेना का अड्डा है, जिसे अमेरिका ने आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। यहां लड़ाकू विमान, मानव रहित विमान और सहायता बल तैनात रहते हैं। इसके अलावा सीरिया सीमा के निकट स्थित टावर-२२ चौकी, प्रिंस हसन वायुसेना अड्डा, किंग फैसल वायुसेना अड्डा तथा अन्य प्रशिक्षण और सीमा चौकियों पर भी अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अनुमान है कि जॉर्डन में अमेरिका के तीन से चार हजार सैनिक मौजूद हैं।
ईरान की इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन के मुवाफ्फक साल्टी वायुसेना अड्डे और प्रिंस हसन वायुसेना अड्डे के साथ-साथ कुवैत, बहरीन, ओमान और सीरिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के अनुसार बैलिस्टिक मिसाइलों और मानव रहित विमानों के जरिए लड़ाकू विमानों, कमान केंद्रों, हथियार भंडारों, ईंधन भंडारण स्थलों तथा अन्य सामरिक ठिकानों पर हमले किए गए।
ईरान का यह भी दावा है कि उसकी मिसाइलों ने जॉर्डन स्थित मुवाफ्फक साल्टी वायुसेना अड्डे पर तैनात अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया। इस बीच खुले स्रोतों से सामने आए कुछ वीडियो में मिसाइलों को रोकने के लिए अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा कई अवरोधक प्रक्षेपास्त्र दागे जाते दिखाई देते हैं। इन वीडियो के आधार पर कुछ विश्लेषकों का कहना है कि सभी मिसाइलों को रोका नहीं जा सका, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसके जवाबी हमलों में अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं और कई सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर जॉर्डन की सेना ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली ईरान की दस मिसाइलों को मार गिराया। जॉर्डन के अनुसार इन हमलों में न तो कोई जनहानि हुई और न ही किसी प्रकार का नुकसान हुआ।
इस बीच ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हाल के अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 46 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में मारे गए आठ लोग भी शामिल हैं। वहीं अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार सोमवार से अब तक सेना और नौसेना के कुल 13 सैनिक घायल हुए हैं। युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 427 सैनिकों के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि दोनों पक्षों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।




