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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ढोंगी बाबा अशोक खरात की पत्नी भी ईडी के शिकंजे में, 3,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल

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मुंबई  । महाराष्ट्र के चर्चित ढोंगी बाबा अशोक खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए उनकी पत्नी कल्पना खरात को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी ने मुंबई की विशेष अदालत में अशोक खरात, उनकी पत्नी और चार अन्य सहयोगियों के खिलाफ 3,000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट 30 गवाहों के बयान और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है।
ईडी के अनुसार, अशोक खरात पर अपराध से अर्जित लगभग 42.88 करोड़ रुपये की राशि को विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में कल्पना खरात ने भी सहयोग किया और अपने नाम पर संपत्तियां खरीदकर कथित अवैध कमाई को छिपाने में भूमिका निभाई। एजेंसी का कहना है कि वह केवल नाममात्र की मालिक नहीं थीं, बल्कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित अवैध धन को फर्जी बैंक खातों, सहकारी संस्थाओं, नकद लेनदेन और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में अचल संपत्तियों में निवेश के जरिए खपाया गया। नाशिक, अहमदनगर, पुणे, सोलापुर और मुंबई में जमीन और अन्य संपत्तियां परिवार के सदस्यों तथा करीबी सहयोगियों के नाम पर खरीदे जाने का आरोप है, ताकि वास्तविक स्वामित्व छिपाया जा सके।
ईडी ने चार्जशीट में वर्ष 2003-04 के एक भूमि सौदे का भी उल्लेख किया है। एजेंसी के अनुसार, अशोक खरात और उनके सहयोगियों पर एक परिवार को कथित तौर पर झूठे धार्मिक दावों और भय का माहौल बनाकर कम कीमत पर जमीन बेचने के लिए मजबूर करने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन बेहद कम राशि में अपने नाम कराई गई।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि भूमि सौदे और अन्य वित्तीय लेनदेन के दौरान कल्पना खरात की मौजूदगी और उनके नाम पर संपत्तियों की खरीद के संबंध में गवाहों तथा वित्तीय रिकॉर्ड से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पाथर्डी क्षेत्र में उनके नाम पर संयुक्त रूप से संपत्ति होने का भी उल्लेख किया गया है।
ईडी की जांच में अशोक खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बवाके की भूमिका भी सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि उसने कई बैंक खातों के संचालन, नकद लेनदेन और संपत्ति सौदों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा दो सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों और बैंक अधिकारियों पर भी फर्जी खाते खोलने तथा केवाईसी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
ईडी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की सुनवाई फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
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