ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया
थान खम्हरिया। नगर में शीतला जुड़वास में आयोजित द्वितीय वर्ष श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन गुरुवार को गीता प्रवचन, पूर्णाहुति, तुलसी वर्षा एवं महाभंडारे के साथ श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ-हवन में आहुति देकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
कथा व्यास आचार्य अक्षय नारायण दुबे ने श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस सुदामा-कृष्ण मिलन, शिशुपाल वध, राजा परीक्षित को मोक्ष तथा श्री शुकदेव जी की विदाई के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने गीता प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों के वचनों की रक्षा के लिए स्वयं अपने वचन का भी त्याग कर देते हैं। महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा और भगवान श्रीकृष्ण के शस्त्र न उठाने के संकल्प के बीच जब धर्म की रक्षा का प्रश्न आया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त की प्रतिज्ञा का मान रखने के लिए रथ का पहिया उठाकर अपना प्रण भी तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम और विश्वास की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
कथा के समापन पर महाआरती की गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं पर तुलसी एवं पुष्प वर्षा की गई। पूरा वातावरण भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात आयोजित महाभंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजक समिति के सदस्य घसिया निषाद, रामफल यदु, सोमनाथ सिन्हा, रामस्नेही नामदेव, मनोज सिन्हा, हरिश्चंद्र साहू, गणेशु साहू, कुमार पाल, राजकुमार सेन, पार्षद सूरज पाल एवं टेकराम पाल सहित सभी श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा। समापन अवसर पर नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।




