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देशभर में 20,149 जन औषधि केंद्र संचालित, मार्च 2027 तक 25 हजार केंद्र खोलने का लक्ष्य

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ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत देशभर में किफायती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है। 30 जून 2026 तक देश में 20,149 जन औषधि केंद्र संचालित हो चुके हैं। सरकार ने मार्च 2027 तक इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
2,110 दवाएं और 315 चिकित्सा उत्पाद उपलब्ध
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत 2,110 जेनेरिक दवाएं तथा 315 शल्य चिकित्सा उत्पाद, चिकित्सा उपभोग्य सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी, पाचन संबंधी रोगों और पोषण संबंधी आवश्यकताओं से जुड़ी दवाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर मिलती हैं, जिससे आम नागरिकों के उपचार पर होने वाला खर्च काफी कम हुआ है।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कड़ी व्यवस्था
सरकार ने जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली लागू की है।
इसके तहत केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (जीएमपी) मानकों का पालन करने वाली इकाइयों से ही दवाओं की खरीद की जाती है।
साथ ही प्रत्येक दवा बैच की आपूर्ति से पहले गुणवत्ता जांच अनिवार्य है। दवाओं का परीक्षण केवल राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त और गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिसेज (जीएलपी) मानकों का पालन करने वाली प्रयोगशालाओं में कराया जाता है।
आपूर्ति व्यवस्था को बनाया गया मजबूत
मंत्री ने बताया कि जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित की गई है। इसके तहत देशभर में पांच केंद्रीय गोदाम और 42 वितरकों का नेटवर्क कार्य कर रहा है।
सितंबर 2024 से सबसे अधिक उपयोग में आने वाली 200 आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के लिए जन औषधि केंद्र संचालकों को विशेष प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। इसके अलावा 400 सर्वाधिक मांग वाली दवाओं की नियमित निगरानी और मांग का डिजिटल आकलन किया जा रहा है।
स्वतंत्र मूल्यांकन में योजना सफल
वित्त वर्ष 2023-24 में कराए गए स्वतंत्र मूल्यांकन में पाया गया कि जन औषधि केंद्रों के विस्तार से ग्रामीण, दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण तथा सस्ती जेनेरिक दवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
शिकायत दर्ज कराने की भी सुविधा
यदि किसी जन औषधि केंद्र पर दवा उपलब्ध नहीं होती है तो नागरिक केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम), ष्शद्वश्चद्यड्डद्बठ्ठह्लह्यञ्चद्भड्डठ्ठड्डह्वह्यद्धड्डस्रद्धद्ब.द्दश1.द्बठ्ठ पर ई-मेल अथवा 1800-180-8080 हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे
सरकार जन औषधि दवाओं की स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए देशभर में नियमित जागरूकता अभियान भी चला रही है। इसके तहत प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो, सोशल मीडिया, जनसंपर्क कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर, नुक्कड़ नाटक, विद्यालय एवं महाविद्यालयों में संगोष्ठियां तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जनसहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
हर वर्ष मार्च के पहले सप्ताह में जन औषधि सप्ताह मनाकर नागरिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं के लाभों की जानकारी दी जाती है।
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक केंद्र
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 4,226 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। इसके बाद केरल (1,833), कर्नाटक (1,720), तमिलनाडु (1,631), बिहार (1,304) और पश्चिम बंगाल (1,014) का स्थान है। छत्तीसगढ़ में 371 जन औषधि केंद्र संचालित हैं।
सरकार का मानना है कि जन औषधि केंद्रों के विस्तार से देशभर में गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी तथा आम नागरिकों का चिकित्सा खर्च कम करने के साथ-साथ सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
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