पोषण ट्रैकर से हो रही रीयल-टाइम निगरानी, कुपोषण प्रबंधन के लिए संयुक्त प्रोटोकॉल भी लागू
नई दिल्ली, )। केंद्र सरकार ने शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की समस्या को कम करने और मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार लाने के उद्देश्य से मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) को प्रभावी रूप से लागू किया है। इस मिशन के तहत आधुनिक डिजिटल निगरानी व्यवस्था, संतुलित पोषण, सामुदायिक जागरूकता और कुपोषण प्रबंधन के लिए व्यापक रणनीति अपनाई गई है।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि यह केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को मिल रहा लाभ
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं तथा आकांक्षी जिलों एवं पूर्वोत्तर राज्यों की 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को पोषण संबंधी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस मिशन में आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए संचालित योजनाओं को एकीकृत किया गया है।
पोषण ट्रैकर से बढ़ी पारदर्शिता और निगरानी
मंत्रालय ने मार्च 2021 में पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन शुरू किया, जो आंगनवाड़ी केंद्रों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की निगरानी का महत्वपूर्ण डिजिटल माध्यम बन चुका है।
इस एप्लिकेशन के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्रारंभिक बाल शिक्षा गतिविधियों, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, गर्म पके भोजन और घर ले जाने योग्य राशन के वितरण सहित विभिन्न सेवाओं का लगभग वास्तविक समय में रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा और आवश्यक सुधार संभव हो रहे हैं।
घर ले जाने योग्य राशन के वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चेहरे की पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) भी लागू की गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि लाभ केवल पंजीकृत पात्र लाभार्थी को ही मिले।
कुपोषण रोकने के लिए नई रणनीति
मिशन के तहत कुपोषण कम करने के लिए सामुदायिक भागीदारी, जनजागरूकता अभियान, व्यवहार परिवर्तन, मातृ पोषण, शिशु एवं बाल पोषण तथा गंभीर एवं मध्यम तीव्र कुपोषण के उपचार पर विशेष बल दिया जा रहा है।
इस रणनीति का उद्देश्य बच्चों में बौनापन, अल्प वजन, एनीमिया और कुपोषण की समस्या को कम करना तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना है।
संशोधित पोषण मानकों के अनुसार मिल रहा पूरक आहार
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और पात्र किशोरियों को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।
जनवरी 2023 में संशोधित पोषण मानकों के तहत अब केवल कैलोरी पर नहीं, बल्कि संतुलित एवं विविध आहार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वस्थ वसा, कैल्शियम, जस्ता, लौह तत्व, फोलेट तथा विटामिन ए, बी-6 और बी-12 जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल किए गए हैं।
गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण के रूप में घर ले जाने योग्य राशन भी उपलब्ध कराया जाता है।
कुपोषण प्रबंधन के लिए संयुक्त प्रोटोकॉल लागू
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से कुपोषण प्रबंधन प्रोटोकॉल जारी किया है। इसके तहत समुदाय स्तर पर गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान, स्वास्थ्य जांच, जटिलता रहित बच्चों का घर पर पौष्टिक स्थानीय भोजन के माध्यम से उपचार तथा आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।
जागरूकता अभियान पर विशेष जोर
सरकार का मानना है कि कुपोषण से लड़ाई केवल पोषण उपलब्ध कराने से नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन से भी संभव है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान देशभर में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
इसके अलावा सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रत्येक माह दो सामुदायिक आधारित कार्यक्रम आयोजित करना अनिवार्य किया गया है, ताकि लोगों में संतुलित आहार, स्वच्छता और पोषण संबंधी सही आदतों को बढ़ावा दिया जा सके।
सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक, बेहतर पोषण मानकों, सामुदायिक सहभागिता और प्रभावी निगरानी व्यवस्था के माध्यम से मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 देश में मातृ एवं शिशु पोषण सुधारने तथा कुपोषण को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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