मुंबई से लौटने के बाद योगेश का भाटापारा रेलवे स्टेशन पर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।योगेश साहू की उपलब्धियों की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और संस्थान में टॉपर रहे। कैंपस प्लेसमेंट में उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली थी, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपना लक्ष्य आईएएस बनना तय किया और नौकरी छोड़ दी। केबीसी में 50 लाख रुपये के सवाल में योगेश के सामने कुछ शहरों और वर्षों की एक सूची रखी गई थी। उन्हें गायब शहर का नाम पहचानना था। विकल्पों में त्रिशूर, मैसूर, अल्मोड़ा और तिरुचिरापल्ली शामिल थे। योगेश ने अपनी आखिरी लाइफलाइन ‘संकेत सूचक’ का इस्तेमाल किया। मिले संकेत से उन्होंने सवाल की कड़ी को नोबेल पुरस्कार विजेताओं से जोड़ा और सही जवाब तिरुचिरापल्ली चुना। जवाब सही होने के साथ ही उन्होंने 50 लाख रुपये जीत लिए। इसके बाद जब उनके सामने एक करोड़ रुपये का सवाल आया तो योगेश ने जोखिम लेने के बजाय 50 लाख रुपये लेकर खेल छोड़ने का फैसला किया।