Home छत्तीसगढ़ दिव्य चातुर्मास महोत्सव में सपाद लक्षेश्वर धाम पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु

दिव्य चातुर्मास महोत्सव में सपाद लक्षेश्वर धाम पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु

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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के आशीर्वचन से गूंज रहा सलधा धाम

ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

थान खमरिया। बेमेतरा जिले के ग्राम सलधा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम में ज्योति पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का चातुर्मास व्रत अनुष्ठान महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ आयोजित हो रहा है। 29 जुलाई से 26 सितंबर तक चल रहे इस भव्य धार्मिक आयोजन के चलते सपाद लक्षेश्वर धाम इन दिनों प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र के रूप में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
चातुर्मास महोत्सव का संचालन सपाद लक्षेश्वर धाम के स्वामी ज्योतिर्मानंद जी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचकर कथा एवं धर्मसभा में शामिल हो रहे हैं तथा भंडारे में भोजन-प्रसादी ग्रहण कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद


जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज अपने सरल, प्रभावशाली एवं मनमोहक शैली में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विषयों पर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके आशीर्वचन सुनने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु सपाद लक्षेश्वर धाम पहुंच रहे हैं।
बनारस से पहुंचे बाल ब्रह्मचारी
चातुर्मास महोत्सव में बनारस से सैकड़ों की संख्या में बाल ब्रह्मचारी भगवाधारी संत सेवा के लिए पहुंचे हुए हैं। उनकी उपस्थिति धाम के धार्मिक वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना रही है तथा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
आयोजन के दौरान प्रतिदिन वेद-पुराण प्रवचन, धर्मसभा, आशीर्वचन, आध्यात्मिक चर्चा एवं लोककल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समाज और राष्ट्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी संत-महात्माओं द्वारा श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
करपात्री जी महाराज और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा धाम
सपाद लक्षेश्वर धाम का संबंध संत परंपरा के महान संत करपात्री जी महाराज तथा द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज की आध्यात्मिक परंपरा से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है। यही कारण है कि चातुर्मास महोत्सव के दौरान इस क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण और श्रद्धालुओं की आस्था का विशेष संगम देखने को मिल रहा है।

ज्योतिर्लिंग मंदिर निर्माण में श्रद्धालु कर रहे सहयोग

सपाद लक्षेश्वर धाम में प्रस्तावित ज्योतिर्लिंग मंदिर निर्माण के लिए भी श्रद्धालुओं द्वारा अपनी श्रद्धानुसार सहयोग किया जा रहा है। चातुर्मास महोत्सव के माध्यम से धाम के धार्मिक महत्व को और विस्तार मिलने के साथ ही क्षेत्र में मंदिर निर्माण एवं धार्मिक गतिविधियों को लेकर भी लोगों में उत्साह देखा जा रहा है।
चातुर्मास हिंदू धर्म की प्रमुख आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है। इस अवधि में संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर साधना, स्वाध्याय, धर्मप्रचार और लोककल्याण के कार्य करते हैं। सपाद लक्षेश्वर धाम में आयोजित यह चातुर्मास महोत्सव भी इसी सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी संत-महात्मा, विद्वान एवं श्रद्धालु प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में चातुर्मास महोत्सव को लेकर उत्साह और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

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