Home छत्तीसगढ़ आज विराजेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश, गणेश चतुर्थी को लेकर भक्तों में उत्साह

आज विराजेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश, गणेश चतुर्थी को लेकर भक्तों में उत्साह

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नगर के घर-घर और पंडालों में होगी गणपति बप्पा की स्थापना, 10 दिनों तक भक्तिमय रहेगा माहौल

ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

थान खम्हरिया। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व को लेकर नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। आज विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की प्रतिमाएं घरों और सार्वजनिक पंडालों में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ स्थापित की जाएंगी। गणेश उत्सव को लेकर गणेश समितियों द्वारा आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। नगर में जगह-जगह आकर्षक पंडाल तैयार किए जा रहे हैं, वहीं घरों में भी गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

गणेश चतुर्थी का पर्व नई शुरुआत, सुख-समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। नगर में इस वर्ष भी सार्वजनिक गणेश पंडालों के साथ बड़ी संख्या में घरों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। रिद्धि-सिद्धि गणेश उत्सव समिति, मारवाड़ी गणेश उत्सव समिति, खेतिहर मजदूर संघ गणेश उत्सव समिति, श्री ऐप्स परिवार गणेश उत्सव समिति तथा वार्ड क्रमांक 9 की गणेश उत्सव समिति सहित विभिन्न समितियों द्वारा गणेश प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इन समितियों द्वारा बनाए जा रहे पंडाल नगरवासियों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

दिन-रात पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटे युवा

गणेश उत्सव को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। विभिन्न गणेश उत्सव समितियों के सदस्य दिन-रात एक कर अपने-अपने वार्डों में भव्य एवं आकर्षक पंडाल तैयार करने में जुटे हुए हैं। पंडालों को सजाने के साथ ही विद्युत व्यवस्था, पूजा-अर्चना और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्थापना के बाद आगामी 10 दिनों तक नगर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहेगा।

नई शुरुआत के देवता हैं भगवान गणेश

पंडित ज्ञानचंद जोशी ने बताया कि हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश का विशेष स्थान है। किसी भी पूजा, हवन अथवा मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की स्तुति एवं पूजा-अर्चना के साथ की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना गया है। यही कारण है कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत श्री गणेश की वंदना के साथ करने की परंपरा है।

गणेश चतुर्थी का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व होने के साथ ही यह सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। सार्वजनिक गणेश पंडालों में सभी वर्गों के लोग एक साथ उत्सव में शामिल होते हैं। नगर में आगामी दिनों में गणपति बप्पा की भक्ति और जयघोष से वातावरण भक्तिमय रहने की उम्मीद है।

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