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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ईडी कई मामलों में बिना ठोस सबूत आरोप लगाती है

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रायपुर/नई दिल्ली -छत्तीसगढ़ के चर्चित 2161 करोड़ रुपए के शराब घोटाला में जेल में बंद आरोपी अरविंद सिंह की जमानत याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है।

कोर्ट ने कहा कि ईडी की शिकायतों में एक पैटर्न दिखता है। इसमें केंद्रीय एजेंसी आरोप तो लगाती है, लेकिन उसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं देती। हमने ईडी की कई शिकायतें देखी हैं। इनमें सिर्फ आरोप होते हैं। उनमें किसी ठोस सामग्री का उल्लेख नहीं होता।

कोर्ट ने ईडी से पूछा- वह कौन-सा ठोस आधार है, जिससे यह कहा जा रहा है कि अरविंद सिंह ने 40 करोड़ रुपए कमाए? ईडी की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी इसे लेकर कोई ठोस सबूत नहीं दिखा सके। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 मई के लिए तय की है।

कोर्ट रूम लाइव: 40 करोड़ की कमाई का आरोपी से सीधा संबंध नहीं बता पाए

जस्टिस ओक: अगर आपने (ईडी) किसी (आरोपी अरविंद सिंह) पर इतनी बड़ी रकम कमाने का आरोप लगायौ, तो यह भी बताना होगा कि वह किस कंपनी से जुड़ा है, क्या वह उसका डायरेक्टर है, क्या वह बहुसंख्यक शेयरधारक है या प्रबंध निदेशक है। लेकिन ईडी की शिकायतों में ऐसा कोई विवरण नहीं है।

ईडी: वे उन कंपनियों को चला रहे थे, जिनसे घोटाला हुआ।

जस्टिस ओक: 40 करोड़ का आरोपी से सीधा संबंध क्या है?

ईडी: यह रकम अर​विंद और विकास अग्रवाल ने मिलकर कमाई। कोर्ट: क्या विकास अग्रवाल को आरोपी बनाया गया है?ईडी: लुकआउट सर्कुलर जारी है। अभी आरोपी नहीं बनाया गया।

आरोपी के वकील: मेरा मुवक्किल 10 महीने से ईडी हिरासत में है। ईडी ने 25 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है और 150 से ज्यादा गवाहों के बयान लिए। इसके बावजूद जांच पूरी नहीं हुई।

ईडी: यह 2000 करोड़ से ज्यादा का घोटाला है। दस्तावेजों की मात्रा के आधार पर जमानत दी जाने लगी, तो पहले दिन ही सभी बाहर आ जाएंगे। सिंह की गिरफ्तारी को एक साल भी नहीं हुआ है।

जस्टिस ओका: जमानत देने के लिए एक साल की हिरासत कोई कानूनी शर्त नहीं है। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

पूर्व आबकारी मंत्री समेत ये जेल में

इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा जेल में बंद हैं। इनके अलावा रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा, आईटीएस अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, नीतेश पुरोहित और नोएडा के कारोबारी विधु गुप्ता को भी ईडी गिरफ्तार कर चुकी है। इनके खिलाफ ईडी के अलावा ईओडब्ल्यू भी जांच कर रही है। आरोप है कि अरुणपति ने शराब घोटाले के लिए एक सिंडीकेट खड़ा किया। इसमें कवासी को हर माह 2 करोड़ रु. कमीशन दिया जाता था।

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