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मंदिरहसौद, आरंग, अभनपुर के 20 गांवों में जमीन की खरीदी और बिक्री बैन, ताकि न हो फर्जीवाड़ा

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आरंग, मंदिरहसौद और अभनपुर के करीब 20 गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इससे आने वाले दिनों में वहां की बड़ी आबादी को कई तरह की परेशानी होगी। वे अपनी मर्जी या जरूरत के समय जमीन की खरीदी-बिक्री नहीं कर सकेंगे। दरअसलरेलवे खरसिया-नवा रायपुर-परमलकसा के लिए नई रेल लाइन बिछाने का काम शुरू करने वाला है।

रेलवे ने कलेक्टर को चिट्ठी लिखकर जहां-जहां से रेल लाइन गुजर रही है उन सभी गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी। उनके अफसरों का कहना है कि जैसे ही यह खबर बाहर आती है कि नई रेल लाइन बिछनी है जमीन दलाल सक्रिय हो जाते हैं। वे किसानों की जमीन कम कीमत में खरीदकर उसका ज्यादा मुआवजा पाते हैं। इस वजह से नवा रायपुर, मंदिरहसौद, आरंग और अभनपुर में करीब 20 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री रोकी जाए।

रेलवे की इस चिट्ठी के बाद कलेक्टर ने तत्काल संबंधित एसडीएम को चिट्ठी लिखकर जमीन खरीदी-बिक्री पर बैन लगाने कहा। उनके आदेश के बाद अब इन सभी जगहों पर जमीन की रजिस्ट्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम सड़क बन​ाने के दौरान अभनपुर के कई गांवों में मुआवजे का जमकर खेल खेला गया। इसमें 48 करोड़ रुपए से अधिक का गोलमाल किया गया।

इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू के साथ ही ईडी भी कर रही है। चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रेलवे प्रशासन को डर था कि इसी तरह की गड़बड़ी इस रेल योजना में भी न हो जाए। इसलिए काम शुरू करने के पहले आनन-फानन में दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे बिलासपुर के उप मुख्य अभियंता राकेश कुमार दिव्य ने जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगाने के लिए रायपुर कलेक्टर को 9 अप्रैल को चिट्टी लिखी थी।

इसमें यह कहा गया है कि प्रस्तावित रेल लाइन की जानकारी होने के बावजूद कुछ लोग और दलाल बिना किसी वैध अनुमति या कानूनी जांच के जमीन के लेन-देन में लिप्त हो जाते हैं। इससे आने वाले समय में गांवों के लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करने के साथ ही सार्वजनिक परियोजना के काम में भी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। इसलिए रोक लगाना जरूरी है।

प्रतिबंध लगाने का विरोध भी शुरू : तीन तहसीलों समेत नवा रायपुर के आसपास के गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री पर बैन लगाने का विरोध भी शुरू हो गया है। गांव के लोगों के साथ ही​ जिला और जनपद के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस तरह से प्रतिबंध लगाने से कई जरूरी काम रुक जाते हैं। गांव वालों को स्वास्थ्य, शादी या किसी भी तरह की इमरजेंसी में रकम की जरूरत होती है। ऐसे में वे अपनी ही जमीन की बिक्री नहीं कर पाएंगे। जमीन की खरीदी-बिक्री नहीं होने से गांवों का विकास भी रुकेगा।

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