उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में पहली बार दो घोड़ियों में खतरनाक और जानलेवा ग्लैण्डर्स बीमारी का पता चला। यह संक्रामक बिमारी एक से दूसरे जानवरों और मनुष्यों में तेजी से फैल सकता है।
उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में पहली बार दो घोड़ियों में खतरनाक और जानलेवा ग्लैण्डर्स बीमारी का पता चला। यह संक्रामक बिमारी एक से दूसरे जानवरों और मनुष्यों में तेजी से फैल सकता है। जैसे ही बीमारी की पुष्टि हुई सरगुजा कलेक्टर एवं पशु विभाग ने एक आदेश पारित कर अंबिकापुर नगर निगम सीमा क्षेत्र में घोड़ा या खचर पर 3 महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। दोनों घोड़ियों को शुक्रवार की शाम को शहर से लगे भिट्ठी गांव लाया गया जहां पहले से ही गड्ढा खोद कर रखा गया था,जहर का इंजेक्शन देने के बाद दोनों की मौत हो गई इसके पश्चात दोनों के शव को गड्ढे में दफना दिया गया है। यह काम उपसंचालक पशुपालन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में किया गया है। जानकारी के अनुसार, पशु चिकित्सा मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।
सरगुजा कलेक्टर ने भी इस संबंध में पत्र जारी कर गाइडलाइंस का पालन करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें कहा गया है कि पशु-चिकित्सकों की 10 सदस्यों की टीम शुक्रवार की दोपहर दोनों संक्रमित घोड़ियों को जहर देकर मौत की निंद सुला दिया जाए।
ग्लैंडर्स है घातक बीमारी-
उपसंचालक पशु चिकित्सा आर पी शुक्ला ने बताया कि ग्लैण्डर्स एक भयानक बीमारी है. इसके लक्षण में शरीर में फफोले पड़ना, शरीर में विकृति आना और अंत में मौत तक हो सकती है।यह बीमारी इंसानों में भी फैल सकती है. इसलिए बीमार घोड़ों को जहर देकर मार दिया गया है। शुक्ला ने बताया कि जिन दोनों घोड़ियों में य़ह बीमारी की पुष्टि हुई है उनकी चार बार टेस्ट कराई गई थी,चारों बार रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर उन्हें मारने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा जितने भी शादियों में ये दो घोड़ियों गई थी, उसकी भी हिस्ट्री निकाली जा रही है।घोड़ियों के संपर्क में आये सभी डॉक्टरों और पशु मालिक की जांच की जायेगी।




