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NSA की सख्ती सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे वालों पर होगी कार्रवाई छत्तीसगढ़ के कलेक्टरों को दिए गए विशेष अधिकार

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रायपुर। राज्य सरकार ने संभावित सांप्रदायिक तनाव और लोक व्यवस्था को खतरे में डालने की आशंका को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। गृह विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (हृस््र) के तहत राज्य के 33 जिलों के कलेक्टरों को विशेष अधिकार सौंपे हैं, जो 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेंगे। राज्य शासन की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना में बताया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे की कोशिश कर सकते हैं या उनके सक्रिय होने की आशंका है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
इन जिलों के कलेक्टरों
को मिले अधिकार
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़, सरगुजा, जशपुर, कोरिया, कोरबा, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, महासमुंद, धमतरी, बस्तर (जगदलपुर), दंतेवाड़ा, कांकेर, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कोण्डागांव, बलौदाबाजार, गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, मुंगेली, सूरजपुर, बलरामपुर, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (रूष्टक्च), गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सक्ती जिले के कलेक्टर अब हृस््र के तहत सीधे कार्रवाई कर सकेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत किसी भी व्यक्ति को 12 महीनों तक नजरबंद किया जा सकता है, यदि वह देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला माना जाता है। राज्य सरकारों को यह अधिकार होता है कि वे समय-समय पर जि़ला प्रशासन को यह शक्ति सौंपें।

सरकार का सख्त संदेश
सरकार का यह कदम साफ़ संकेत देता है कि वह राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक सख्ती बरतने को तैयार है। यह निर्णय न सिफऱ् संभावित अराजक तत्वों को चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों को यह भरोसा भी देता है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा।

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