थानखम्हरिया:- मुरारका परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा में कथा व्यास पं. ओमप्रकाश जोशी ने भगवान राम और कृष्ण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। आपके द्वारा बताया गया कि भगवान राम का सातवां अवतार माने जाने वाले प्रभु श्री राम ने हमेशा की तरह अधर्म पर धर्म की विजय हेतु, अवतार धारण किया। महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया। महाराज ने समस्त विद्वान तपस्वी ऋषि मुनियों तथा वेदवित प्रकांड पंडितों को बुलावा भेजा। वह चाहते थे, कि सभी यज्ञ में शामिल हो। यज्ञ का समय आने पर महाराज दशरथ सभी आगंतुक और अपने गुरु बशिष्ट जी समेत अधिपति श्रृंगी ऋषि के साथ यज्ञ मंडप में पधारे फिर विधिवत यज्ञ शुभारंभ किया गया। यज्ञ के प्रसाद में बनी खीर को राजा दशरथ ने अपने तीनों रानियां को दी। प्रसाद ग्रहण करने के परिणाम स्वरूप तीनों रानियां गर्भवती हो गई। सबसे पहले राजा दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया।

इस शिशु का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। चारों पुत्र के जन्म से संपूर्ण राज्य में आनंद का माहौल था। हर कोई खुशी से गंधर्व गान कर रहे थे। और आपस में नृत्य कर रहे थे। देवताओं ने पुष्प वर्षा की महाराज ने ब्राह्मणों और याचकों को दान दक्षिणा दी। और सभी ने महाराज के पुत्रों को आशीर्वाद दिया। महर्षि वशिष्ठ ने महाराज के पुत्रों का नाम रामचंद्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुहन रखा। आगे पं. ओमप्रकाश जोशी ने बताया, भागवत कथा के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग के भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ग्रहण रात्रि में मथुरा के कारगर में वासुदेव और देवकी के घर हुआ था। कंस के अत्याचारों को समाप्त करने और धर्म की स्थापना करने भगवान विष्णु ने यह अवतार लिया था। जन्म लेते ही जेल के बंधन टूट गए। और वासुदेव श्री कृष्ण की टोकरी में लेकर गोकुल में नंद बाबा के पास छोड़ आए। और वहां से नंद बाबा की कन्या को जेल में ले आए। आगे महाराज ने बताया, श्री कृष्ण का जन्म विष्णु के अवतार के रूप में हुआ। और उन्होंने मथुरा को कंस के अत्याचारों से मुक्त करने के लिए अवतार लिया। कृष्ण जन्म पर श्रद्धालुओं एवं माता ने झुम कर नृत्य किया। भाटापारा से पधारे हर गोपाल श्री श्याम मित्र मंडली के भजन प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। सभी ने भजनों की प्रशंसा की इस अवसर पर पूरा मुरारका परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा में रायपुर, बिलासपुर, कोटा, कोरबा, चांपा, भिलाई अनेक स्थानों से रिश्तेदार इष्टमित्रों ने और नगर के श्रद्धालुओ ने कथा का रसपान किया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान कैलाश मुरारका, सुभाष मुरारका, पवन मुरारका, रौनक मुरारका, मनोज मुरारका, पिंकू मुरारका सपत्नीक कथा श्रवण किया।




