ऑनलाइन सत्संग के माध्यम से मातृ दिवस पर दिया प्रेरणादायी संदेश
ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया
थानखम्हरिया। पंचपखड़ खंड पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी सोमेंद्र महाराज जी ने मातृ दिवस के अवसर पर ऑनलाइन सत्संग के माध्यम से मां के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां त्याग, बलिदान, ममता और संस्कारों की प्रतिमूर्ति होती है। उन्होंने कहा कि मातृ दिवस हमें मां के त्याग एवं बलिदान की कहानी को स्मरण कराने का अवसर देता है।
आचार्य सोमेंद्र महाराज जी ने कहा कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि वह परिवार की प्रथम गुरु, शिक्षक, पथप्रदर्शक एवं मार्गदर्शक भी होती है। मां अपने बच्चों को न केवल जीवन देती है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को आकार भी प्रदान करती है। मां का प्यार विश्वास का प्रतीक होता है, उसकी गोद संसार का सबसे सुरक्षित स्थान और उसकी बातें जीवन की सबसे सच्ची सीख होती हैं।
उन्होंने कहा कि मां ममता की मूरत, त्याग की प्रतिमा और जीवन की प्रथम गुरु है। मां के संस्कारों से ही सुसंस्कृत समाज एवं सशक्त राष्ट्र की नींव रखी जाती है। अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस माता एवं मातृत्व के सम्मान का दिवस है, जो समाज में मां की महान भूमिका को रेखांकित करता है।

महाराज जी ने कहा कि मां ही एक ऐसी शक्ति है जो सभी की जगह ले सकती है, लेकिन उसकी जगह कोई अन्य नहीं ले सकता। मां अपने बच्चों की रक्षा और देखभाल हर परिस्थिति में करती है, इसलिए उसे ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि मां 9 माह तक अपनी संतान को गर्भ में रखकर जन्म देती है और उसके बाद जीवनभर उसके पालन-पोषण, शिक्षा एवं संस्कारों में अपना सर्वस्व समर्पित करती है। मां अपनी संतान की रक्षा के लिए हर बड़ी से बड़ी विपत्ति का सामना करने का साहस रखती है।
अंत में आचार्य सोमेंद्र महाराज जी ने समस्त मातृशक्ति को कोटि-कोटि वंदन करते हुए कहा कि मातृ दिवस मनाने का मूल उद्देश्य समस्त माताओं को सम्मान देना एवं शिशु के उत्थान में उनकी महान भूमिका को नमन करना है।




