“चलो गाँव की ओर, फिर देश बनाना है” का दिया प्रेरक संदेश
एकल विद्यालय अभियान के प्रणेता एवं अभिभावक श्रद्धेय श्री श्याम जी गुप्त दिनांक 21 जुलाई 2026 से 27 जुलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ प्रवास पर रहे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने विभिन्न नगरों जैसे दुर्ग – भिलाई, अम्बिकापुर , राजनांदगांव, धमतरी, कांकेर, नयापारा राजिम और रायपुर के बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ का प्रेरक संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “यदि भारत को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है, तो हमें गाँवों की ओर लौटना होगा। वनवासी एवं ग्रामीण समाज को आत्मीयता से अपनाकर उनके सुख-दुःख में सहभागी बनना होगा। जब गाँव सशक्त होंगे, संस्कृति सुरक्षित होगी और समाज संगठित होगा, तभी भारत विश्व में अपनी गौरवपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।”
श्रद्धेय श्री श्याम जी गुप्त का जन्म अविभाजित भारत के पश्चिमी पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ। रामकृष्ण मिशन के विद्यालय में अध्ययन के दौरान वे स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए। राष्ट्रनिर्माण, सेवा और चरित्र निर्माण के उनके आदर्शों ने ही श्री श्याम जी गुप्त के जीवन की दिशा निर्धारित की।
सन 1964 में एम.एससी. (भौतिक विज्ञान) की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने युवावस्था में ही आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया तथा अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा एवं समाजकार्य के लिए समर्पित कर दिया।

उड़ीसा में संघ के सह-प्रांत प्रचारक के रूप में लगभग दस वर्षों तक कार्य करते हुए वे पूज्य स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के सेवा एवं वनवासी उत्थान के कार्यों से प्रेरित हुए। उनके साथ मिलकर उन्होंने सुदूर वनवासी क्षेत्रों में रात्रि विद्यालयों के विस्तार, शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक जागरण का व्यापक अभियान चलाया। सुदूर पिछड़ा ग्रामीण वनवासी समाज के उत्थान में उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय माना जाता है।
वर्ष 1989 में वे एकल विद्यालय अभियान के संस्थापक सदस्यों में रहे तथा वर्ष 1995 में हरिकथा योजना के भी संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। उनके दूरदर्शी नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में एकल विद्यालय अभियान ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, स्वावलंबन, संस्कार तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
आज एकल विद्यालय अभियान विभिन्न सेवा योजनाओं के माध्यम से देश के एक लाख गाँवों में कार्य कर रहा है। छत्तीसगढ़ में ही 4,000 वनवासी गाँवों में 152 विकास खण्ड एवं 23 जिलों में (15अंचल) शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार एवं ग्राम विकास के विविध कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
83 वर्ष की आयु में भी श्रद्धेय श्री श्याम जी गुप्त निरंतर देशभर का प्रवास कर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन कर रहे हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र की सुरक्षा का सबसे सशक्त आधार गाँव हैं। इसलिए प्रत्येक जागरूक नागरिक का दायित्व है कि वह ग्रामीण एवं वनवासी समाज के बीच जाकर शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य एवं स्वावलंबन के कार्यों में सहभागी बने।
उन्होंने विशेष रूप से आह्वान करते हुए कहा, “नगरवासी गाँवों की ओर जाएँ, वनवासी समाज को गले लगाएँ और भगवान श्रीराम के समान प्रेम, आत्मीयता एवं अपनत्व का व्यवहार करें। जब गाँव मजबूत होंगे, हमारी संस्कृति सुरक्षित होगी और भारत एक सशक्त, समृद्ध तथा संस्कारित राष्ट्र के रूप में विश्व का मार्गदर्शन करेगा।”
कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं कार्यकर्ताओं ने श्रद्धेय श्री श्याम जी गुप्त के प्रेरणादायी उद्बोधन को राष्ट्रसेवा का आह्वान बताते हुए ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प को और अधिक गति देने का दृढ़ निश्चय व्यक्त किया।




