Home छत्तीसगढ़ अमरबेल की तरह फैल रहा अतिक्रमण, हटाने में प्रशासन ला

अमरबेल की तरह फैल रहा अतिक्रमण, हटाने में प्रशासन ला

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ब्यूरो चीफ : अनिल सिंघानिया

थानखम्हरिया। ग्राम पद्मी में अतिक्रमण हटाने पहुँची राजस्व विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच हुई नोकझोंक तथा टीम को कुछ समय तक बंधक बनाए जाने की घटना के बाद जिला प्रशासन ने थानखम्हरिया की तहसीलदार सरिता मढ़रिया एवं नायब तहसीलदार मोरध्वज साहू का तबादला कर दिया है। शनिवार को हुई इस घटना में ग्रामीणों के एक पक्ष ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।

जानकारी के अनुसार, 25 जुलाई को राजस्व विभाग की टीम ग्राम पद्मी में अतिक्रमण हटाने पहुँची थी। इस दौरान ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कहा कि ग्राम सभा द्वारा अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए पारित प्रस्ताव पर छह माह बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, जिन लोगों के विरुद्ध शिकायत की गई थी, उनकी कथित झूठी शिकायत के आधार पर लगभग 80 ग्रामीणों के खिलाफ बिना पूर्व सूचना कार्रवाई करने टीम गाँव पहुँच गई। इस बात को लेकर पंचायत भवन में ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। आक्रोशित ग्रामीणों ने कुछ समय के लिए राजस्व विभाग की टीम को बंधक भी बना लिया। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और पुराने मामले में भी शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर स्थिति सामान्य हुई।

घटना के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित तहसीलदार और नायब तहसीलदार का स्थानांतरण कर दिया।

अतिक्रमण बन रहा बड़ी समस्या

नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते अतिक्रमण अब विवाद, मारपीट और कानून-व्यवस्था की समस्या का कारण बनते जा रहे हैं। गौठान, चारागाह, मुक्तिधाम, नदी-नालों के किनारे तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के लिए आरक्षित भूमि पर लगातार कब्जे किए जा रहे हैं। खाली पड़ी निजी भूमि भी भूमाफियाओं और दबंगों के निशाने पर रहती है। प्रशासन की ढीली कार्यशैली के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक अतिक्रमण प्रकरण न्यायालयों में लंबित हैं, लेकिन पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई के अभाव में इनका समाधान नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप छोटे-छोटे विवाद कई बार गंभीर संघर्ष का रूप ले लेते हैं। अतिक्रमण के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

थानखम्हरिया नगर में महाविद्यालय की लगभग आठ एकड़ शासकीय भूमि वर्षों से अवैध कब्जे में है, जिसे प्रशासन अब तक मुक्त नहीं करा सका है। यही कारण है कि लगभग पाँच वर्ष पूर्व स्वीकृत पॉलीटेक्निक महाविद्यालय भवन का निर्माण कार्य भी काफी विलंब से शुरू हो पाया।

रिक्त पद भी बन रहे बाधा

राजस्व विभाग में कर्मचारियों की कमी भी कार्रवाई की गति को प्रभावित कर रही है। तहसील कार्यालय में एक नायब तहसीलदार, एक राजस्व निरीक्षक तथा कई पटवारियों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके अलावा कई अधिकारी मुख्यालय में निवास नहीं कर दुर्ग, भिलाई, रायपुर और कवर्धा जैसे शहरों से आवागमन करते हैं, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय और राजस्व संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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