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आजादी के सात दशक बाद भी समद्वारा से सुखाताल तक नहीं बनी पक्की सड़क, ग्रामीणों में आक्रोश

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चुनाव के समय सांसद-विधायक करते हैं सड़क निर्माण के वादे, आज तक नहीं हुई सुनवाई; ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

ब्यूरो चीफ अनिल सिंघानिया

थान खमरिया। देश को आजाद हुए सात दशक से अधिक समय बीत चुका है। देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इसका उदाहरण साजा विकासखंड क्षेत्र के समद्वारा से सुखाताल तक जाने वाली लगभग 4 किलोमीटर लंबी सड़क है, जिसका पक्कीकरण आज तक नहीं हो पाया है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को प्रतिदिन आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जनता त्रस्त है और नेता मस्त हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, चुनाव के दौरान सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही इन वादों को भुला दिया जाता है। समद्वारा से सुखाताल तक सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। विशेषकर बरसात के दिनों में कच्ची सड़क की स्थिति बेहद खराब हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में विकास के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र के विकास की उम्मीद लगाई थी, लेकिन सड़क जैसी बुनियादी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान सांसद विजय बघेल, विधायक ईश्वर साहू, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना एवं जिला कलेक्टर को भी आवेदन देकर सड़क निर्माण की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी

समद्वारा से सुखाताल तक पक्की सड़क नहीं होने का सबसे अधिक खामियाजा स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण आवागमन के साधन आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते। स्कूली बच्चों को प्रतिदिन स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। वहीं, किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसे अस्पताल पहुंचाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

ग्राम प्रमुख राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, रामावतार सिंह राजपूत, शैलेश गुप्ता, नवरत्न एवं चंद्रशेखर पटेल सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी लगभग 4 किलोमीटर सड़क के निर्माण एवं पक्कीकरण के लिए शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में पहल नहीं की गई तो आगामी चुनाव में वे मतदान का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होंगे।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि समद्वारा से सुखाताल तक लगभग 4 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके और बच्चों की शिक्षा तथा मरीजों के उपचार में आने वाली परेशानियों से राहत मिल सके।

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