रायपुर। अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं है, इसे चरितार्थ किया है गरियाबंद के सारागांव की उत्तरा ध्रुव ने , जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत से आगे बढऩे का मार्ग तलाश लिया है। वह मेहनत और लगन से विविध कार्यो का सम्पादन कर रही हैं और अतिरिक्त आमदनी के जरिए आत्मनिर्भर बन दूसरी महिलाओं की प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर उत्तरा ने अपने परिवार के लोगों पर आश्रित ना होकर अपने पैरों पर खड़ी हैं। ग्राम चौक स्थित अपनी दुकान में उन्होंने कंप्यूटर व प्रिंटर की सुविधा भी शुरू की है, जिससे ग्रामीणों को दस्तावेज की प्रिंटिंग सेवा मिल रही है और उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है।
गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम सारागांव की उत्तरा ध्रुव ने न सिर्फ अपनी जिंदगी की दिशा बदली, बल्कि अब वे क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं। बिहान योजना ने उत्तरा को केवल एक नई राह ही नहीं दिखाई, बल्कि एक प्रेरणादायी पहचान भी दी है।
स्व सहायता समूह से भरी उड़ान- महिमा महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य उत्तरा ने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर अपने खेत में बोर खनन कराया और ढाई एकड़ भूमि में डबल फसल लेना शुरू किय। इतना ही नहीं इससे वर्तमान में वे खरीफ सीजन में लगभग 70 हजार और रबी सीजन में 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। खेती के साथ-साथ उन्होंने अपने गांव में किराना दुकान भी प्रारंभ किया है, जिससे उनकी आमदनी में और इज़ाफा हुआ है। इसके अलावा, वे रिसोर्स बुक कीपर के रूप में कार्य कर रही हैं और उन्हें समूह के पंजीयन, लेखा कार्यों की निगरानी एवं ऑडिट जैसी जिम्मेदारियों के लिए प्रति माह पांच हजार रुपये मानदेय भी दिया जा रहा है।



