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सीजेपी का धरना खत्म करने का ऐलान, सरकार के साथ तीनों मांगों पर बनी सहमति

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नई दिल्ली : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई। बातचीत के दौरान सरकार सभी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने और जान गंवाने वाले छात्रों के परिजन को मिलेंगे 1-1 करोड़ देने को राजी हो गई। वार्ता में सरकार की ओर से केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह, जबकि सीजेपी की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका शामिल हुए। बाद में चारों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन को खत्म करने का ऐलान किया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र आंदोलन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा और आंदोलन को राष्ट्रविरोधी ताकतों से बचाने के लिए लिया गया है। वहीं, केंद्र सरकार ने पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा करने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक छात्र आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। मोदी सरकार में किसी वरिष्ठ मंत्री का लंबे समय तक चले जन आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बीच इस्तीफा देना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही थी। तीसरे दौर की वार्ता से कुछ घंटे पहले प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने इस्तीफे की घोषणा की। इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लिए गैर-समझौतावादी मुद्दा है। धर्मेंद्र प्रधान के लंबे सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। यही वह स्थान है, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था और आंदोलन का केंद्र बना हुआ था।
सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है, उन्हें पद से हटाया नहीं गया। इससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार उन्हें सम्मानजनक विदाई देना चाहती थी। ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान पहली बार 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने थे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद उन्हें दोबारा इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
उधर, आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधन के तहत संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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